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कविता बेड पर नंगी

काफी लड़कियाँ और भाभियाँ मेरी कहानियाँ पढ़ने के बाद मेरे सेक्स नेटवर्क से जुड़ी जिनमें से कुछ पैसों और ज्यादातर चुदाई का मजा लेने के लिए जुड़ी । ऐसे ही एक जोड़े कविता और सुरेश के मुझे कई मेल्स आये और उन्होंने मुझसे मिलने की ख्वाहिश जाहिर की मगर हर बार मैं उन्हें मना करती रही क्योंकि पहले मुझे वो झूठे लगे लेकिन जब उन्होंने अपनी कुछ तस्वीरें मेल की तब जाकर मुझे लगा कि वो झूठे नही हैं, इसके बाद मैंने उनसे मिलने के लिए हाँ कर दी और मिलने के लिए एक दिन तय कर लिया। इसके बाद मैंने अपने पति को इस बारे में बताया तो उसने तुरंत कहा कि तुम जैसा चाहती हो कर सकती हो । मैंने कविता और सुरेश को मिलने के लिए एक होटल रिसी एजेंसी बुलाया क्योंकि उनका घर भी उसके पास ही था । आखिर तय दिन पर दोपहर 12 बजे तैयार होकर मैं होटल पहुँच गई, मैंने लाल रंग की साड़ी पहनी थी ।सुरेश और कविता पहले से ही मेरा इन्तजार कर रहे थे, कविता ने टी-शर्ट और स्कर्ट पहनी हुई थी, वो एकदम माल लग रही थी, उसको देखने से ही पता चल रहा था कि वो एक अमीर परिवार से है और सुरेश भी काफी स्मार्ट और अच्छे बदन का है । सुरेश को देखकर एक बार तो मेरी चूत ने पानी छोड़ दिया ।

मुझे देखकर कविता मेरी तरफ़ बढ़ी और मुझसे हाथ मिलाया, मैंने भी इसका जवाब मुस्कुरा कर दिया । इसके बाद उन दोनों ने बताया कि वो दोनों कचनार (जगह का नाम) में रहते हैं, उनके साथ कोई नहीं रहता, वो दोनों पति पत्नी हैं और उनकी शादी को अभी बस 6 महीने हुए हैं । फिर मैंने उनसे मीटिंग का कारण पूछा तो सुरेश ने बताया कि कविता भी मेरे सेक्स नेटवर्क में शामिल होना चाहती है इसी कारण वो मुझसे मिलना चाहते थे कि कहीं मैं झूठी तो नहीं हूँ । मैंने कविता को ऊपर से नीचे तक देखा, चूँकि कविता बहुत ही खूबसूरत लड़की है जिसके चूचे बहुत भारी, करीब 34 होंगे और व्यक्तित्व भी काफी शानदार है । मैंने कहा कि पहले मैं आपका घर देखना चाहती हूँ क्योंकि आपके घर में और कोई नहीं रहता इसलिए हम वहाँ बाकी सारी बातें कर सकते हैं । सुरेश अपनी गाड़ी में और कविता मेरी कार में बैठी और मुझे अपने घर की तरफ ले गई, कविता ने कार एक आलीशान घर के सामने रोकने को कहा, सुरेश पहले से वहाँ हमारा इन्तजार कर रहा था । घर में घुसने के बाद हमारी बातें शुरू हुई, मैंने कविता से पूछा- तुम मेरा सेक्स नेटवर्क क्यूँ ज्वाइन करना चाहती हो ? तो उसने बताया कि वो हमेशा से अनजाने लोगों से चुदना चाहती रही थी मगर उसके परिवार की बन्दिशों के कारण नहीं कर पाई इसलिए उसने शादी के एक हफ्ते बाद ही सुरेश को अपनी यह इच्छा बताई, पहले तो सुरेश ने मन किया लेकिन बाद में मान गया । कविता मेरी कहानियाँ काफी समय से पढ़ती आ रही है, इसलिए उसने मुझसे सम्पर्क किया ।

चूँकि उनके घर में सुरेश और कविता के आलावा और कोई नहीं था और दोनों को कविता की चुदाई से कोई परेशानी नहीं थी इसलिए मैंने कविता को हाँ कर दी । मैंने कविता से पूछा कि क्या तुम काल गर्ल बनने के लिए तैयार हो ? तो उसने कहा- दीदी, मैं बस रण्डी, वेश्या बनने के लिए मरी जा रही हूँ । मैंने अपने पर्स से एक सिगरेट निकाली और कविता की तरफ बढ़ाई और कहा- एक कस तो मार कर दिखाओ ? उसने फटाक से सिगरेट ले ली, इससे पहले वो सिगरेट जलाती उससे पहले मैंने उसे रोका और उसे अपने कपड़े उतारने को कहा । सुरेश बैठे-बैठे सब तमाशा देख रहा था मगर कुछ बोल नहीं रहा था । कविता ने पूछा- कपड़े क्यूँ उतारने पड़ेंगे ? मैंने उसके गाल पर तमाचा मारा और कहा- बहन की लौड़ी रंडी बनने आई है और कपड़े उतारने में नखरे दिखा रही है । मैंने ही उठकर उसकी टी-शर्ट और स्कर्ट खोल दी । अब वो सिर्फ ब्रा और पेंटी में थी, मेरे जोश को देख उसमें भी जोश आ गया और उसने अपने दूध को ब्रा की कैद से आजाद कर दिया और उसके बड़े-बड़े निप्पलस हवा में लहराने लगे । उसके निप्पलस देखकर मुझसे रहा न गया और मैंने अपने होंठ उसके दूध से चिपका दिए । मैं कुछ आगे बढ़ती उससे पहले ही सुरेश बोला- कविता तुम्हारा सेक्स नेटवर्क ज्वाइन करेगी और कभी किसी फीस की डिमांड भी नहीं करेगी मगर मेरी एक शर्त है । मैंने उससे पूछा- क्या शर्त है ? तो उसने कहा- मैं तुम्हें एक बार चोदना चाहता हूँ । मैं तो खुद सुरेश से चुदना चाहती थी क्योंकि वो इतना हृष्ट-पुष्ट और स्मार्ट था । मैंने उसे हाँ कह दिया मगर मैंने कहा- मैं अभी तुम से नहीं चुदूंगी, जब मेरा तुम से चुदने का दिल होगा तब मैं खुद तुमसे चुदने आ जाऊँगी । इस पर सुरेश सहमत हो गया ।

कविता बेड पर नंगी लेटी पड़ी थी और सुरेश का लौड़ा भी पूरे शबाब पर था, कविता बेड पर लेटे-लेटे सिगरेट के कश ले रही थी । सुरेश का लौड़ा काफी बड़ा लग रहा था, मैंने सुरेश की तरफ बढ़ते हुए उसकी पैंट खोल कर उसका अंडरवियर उतारा और कविता की तरफ इशारा करते हुए कहा- तुम्हारी बीवी तुम्हारा इन्तजार कर रही है । सुरेश बोला- कविता मेरा लौड़ा मुँह में नहीं लेती । मैंने कहा- जल्दी ही यह चुदक्कड़ लौड़े भी चूसने लगेगी । मैंने सुरेश का लौड़ा अपने हाथ में पकड़ा, इस वजह से उसका लौड़ा सांप की तरह फनफना उठा । मैंने उसका लौड़ा अपने मुँह में रखा और लॉलीपोप की तरह चूसने लगी तो सुरेश के मुंह से आहा ऊंह ऊम्ह आहा ऊंह ऊम्ह आहा ऊंह ऊम्ह आहा ऊंह ऊम्ह आहा ऊंह ऊम्ह आहा ऊंह ऊम्ह की आवाज़ निकलने लगी । मुझे यह करते देख कविता ने सुरेश को अपनी चूत की तरफ इशारा करके अपनी तरफ बुलाया लेकिन सुरेश मेरे ख्यालों में खोया हुआ था । सुरेश के फनफनाते हुए लौड़े को देखकर मुझे भी जोश आ गया, मैंने भी अपनी साड़ी उतार दी और ब्लाउस के हुक खोलकर उतार दिया और पेंटी और ब्रा में आ गई । सुरेश का एक हाथ मेरी पीठ और दूसरा हाथ मेरे चूतड़ों पर आ गया और उसने मुझे अपने आगोश में समेट लिया । फिर वो अपना मुँह मेरे दूध की तरफ लाया, बिना ब्रा खोले ही ऊपर से जीभ फेरने लगा और मैं आहा ऊंह ऊम्ह आहा ऊंह ऊम्ह आहा ऊंह ऊम्ह आहा ऊंह ऊम्ह आहा ऊंह ऊम्ह आहा ऊंह ऊम्ह करते हुए आन्हे भर रही थी ।

मेरी कामुकता बढ़ती जा रही थी, मैंने अपने हाथ पीछे ले जाकर ब्रा खोल दी और पूरी तरह से सुरेश के रंग में रंग गई । कविता भी अब तक कामुकता के सागर में तैरने को तैयार हो चुकी थी, उसने भी मेरा एक दूध अपने मुँह में ले लिया । सुरेश और कविता दोनों मेरा एक-एक स्तन चूस रहे थे और मेरे मुंह से आहा ऊंह ऊम्ह आहा ऊंह ऊम्ह आहा ऊंह ऊम्ह आहा ऊंह ऊम्ह आहा ऊंह ऊम्ह आहा ऊंह ऊम्ह की सिसकियाँ निकलने लगी । मैंने अपनी पेंटी खोली और अपनी चूत में उंगली करते हुए सुरेश को अपनी चूत चाटने का हुक्म दिया, मैंने कविता को भी शामिल करते हुए अपनी तरफ खींचा और उसके होंठों का रसपान किया । इतने में सुरेश मेरी चूत अपनी जीभ से चाटने लगा और मैं आहा ऊंह ऊम्ह आहा ऊंह ऊम्ह आहा ऊंह ऊम्ह आहा ऊंह ऊम्ह आहा ऊंह ऊम्ह आहा ऊंह ऊम्ह कर रही थी , करीब 15 मिनट तक हम तीनों उसी पोज में लेटे रहे और कविता मेरे होंठों और सुरेश मेरी चूत चाटता रहा ।मैंने सुरेश को अपने ऊपर आने और मेरी चूत का चोदन करने के लिए कहा । तब तक सुरेश का लंड बैठ चुका था । इस बार मैंने कविता से सुरेश का लौड़ा चूसने को कहा जिसे उसने नकार दिया । मैंने उसे बालों से पकड़ते हुए जबरदस्ती सुरेश का लौड़ा कविता के मुंह में घुसा दिया और चूसने को कहा । एक बार मुख में लेने के बाद कविता को भी लौड़ा चूसने में मजा आने लगा और वो भी मजे लेकर सुरेश का लौड़ा चूसने लगी ।इतने सुरेश फिर से मेरे 38 इंच के दूध पर चिपक गया । कविता के चूसने के कारण सुरेश का लौड़ा फिर से खड़ा हो गया।फिर मैंने लौड़े की जिम्मेदारी लेते हुए सुरेश को लिटा कर उसके लौड़े के ऊपर सवार हो गई, सुरेश भी नीचे से झटके मारने लगा क्योंकि मेरी चूत का पहले से ही भोंसड़ा बना हुआ था तो एक ही झटके में सुरेश का पूरा लौड़ा मेरी चूत में आराम से घुस गया और वो झटके ले-लेकर मेरा चोदन करने लगा और मैं आहा ऊंह ऊम्ह आहा ऊंह ऊम्ह आहा ऊंह ऊम्ह आहा ऊंह ऊम्ह आहा ऊंह ऊम्ह आहा ऊंह ऊम्ह करते हुए मजे लेने लगी । करीब 20 मिनट की मेहनत के बाद सुरेश छुट गया और पानी पूरा बिस्तर पर गिर गया । मैंने फिर से उसका लौड़ा चूसा और चूस-चूसकर लौड़ा साफ़ किया । थोड़ी देर में लौड़ा फिर फुफकारने लगा और चूत मांगने लगा, इस बार कविता ने आगे आते हुए सुरेश से चुदवाया । इसके बाद हम तीनों साथ में मिलकर नहाए और आपस में बदन रगड़-रगड़कर मजा किया।

कैसा लगा दोस्तों मेरा ऐसा करना ? मैं जानती हूँ कि अच्छा ही लगा होगा |


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Added: Sunday, June 24th, 2018
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