दोस्त की बीवी का ट्रेन में...

मेरा नाम कमल है मैं लखनऊ का रहने वाला हूं, मेरी उम्र 34 वर्ष है। मैं लखनऊ की ही एक कंपनी में काम करता हूं, उस कंपनी में काम करते हुए मुझे 5 वर्ष हो चुके हैं। मेरे घर पर मेरे भैया और भाभी हैं, उनके दो छोटे बच्चे हैं, मेरे माता-पिता का देहांत कुछ वर्षों पहले ही हो गया था। मेरे भैया भाभी का नेचर बहुत अच्छा है, वह हमेशा ही मुझे बहुत ज्यादा प्रोत्साहित करते हैं, उन्होंने ही मेरी शादी करवाई और जब मेरी शादी हो गई तो उसके बाद मैंने अपने लिए एक घर भी लिया जिसमें कि मेरे भैया ने मेरी काफी मदद की, उन्होंने मुझे घर खरीदने के लिए पैसे भी दिए। मेरी पत्नी का नेचर बहुत अच्छा है और वह भी बहुत ही सपोर्टिव है, मेरी पत्नी का नाम सुलेखा है। सुलेखा के पिता एक बड़े अधिकारी हैं, उनका व्यवहार मेरे साथ बहुत अच्छा है, मैं भी उनकी काफी रिस्पेक्ट करता हूं, वह हमेशा ही मुझे कहते हैं कि कमल तुम बहुत मेहनत करते हो और तुम्हें जब भी मेरी जरूरत पड़े तो तुम मुझे बेझिझक कह देना
एक दिन मेरी पत्नी ने मुझसे कहा मुझे मेरे मामा का फोन आया था, वह मुझे कहने लगे कि तुम काफी समय से हमारे घर नहीं आये हो, कुछ दिनों के लिए तुम हमसे भी मिलने आ जाओ। मैंने सुलेखा से कहा कि यदि तुम अपने मामा से मिलना चाहती हो तो तुम उनसे मिलने चले जाओ, वह मुझे कहने लगी यदि तुम भी मेरे साथ चलते तो कितना अच्छा होता, मैंने सुलेखा से कहा मैं दिल्ली कहां आ पाऊंगा, दिल्ली आने के लिए मुझे समय चाहिए और मैं इतने दिनों की छुट्टी नहीं ले सकता। सुलेखा ने मुझसे जिद की तो मैं भी उसे मना ना कर सका और अगले दिन ही मैंने अपने मैनेजर से अपनी छुट्टी के लिए बात की, उन्होंने मुझे ज्यादा दिन की छुट्टी तो नहीं दी लेकिन मैंने सोचा कि चलो इस बहाने मैं भी थोड़ा फ्रेश हो जाऊंगा, उसके बाद मैं और सुलेखा दिल्ली चले गए।

जब हम दोनों दिल्ली गए तो उसके मामा ने मेरी बड़ी खातिरदारी की, वह कहने लगे कि कुछ दिनों के लिए तुम सुलेखा को यहीं छोड़ दो, उसकी मामी भी बहुत जिद करने लगी। मैंने उनसे कहा कि ठीक है सुलेखा कुछ दिनों के लिए आपके घर पर रह लेगी, मुझे अगले महीने दोबारा दिल्ली काम के सिलसिले में आना है उस वक्त मैं सुलेखा को अपने साथ ले जाऊंगा। सुलेखा इस बात से बहुत खुश हो गई, वह कहने लगी यह तो तुमने बहुत अच्छी बात कही क्योंकि मैं भी काफी समय से अपने मामा मामी के साथ समय नहीं बिता पाई थी। उनके कोई भी बच्चे नहीं है और वह सुलेखा को ही अपनी लड़की मानते हैं इसीलिए मेरी पत्नी मुझसे जिद कर रही थी की मैं कुछ दोनों के लिए मामा के पास रुक जाती हूं। अब मैं वापस लखनऊ आ गया, पहले की तरह ही मैंने अपना काम शुरू कर दिया था, मैं कुछ दिनों के लिए अपने भैया के साथ ही रहने लगा। मेरे भैया और भाभी मुझसे कहने लगे तुम हमारे पास ही रहो क्योंकि तुम ऑफिस से लेट में आते हो और तुम्हें खाना बनाने में भी दिक्कत होगी, मैंने भी सोचा क्यों ना कुछ दिन भैया भाभी के साथ ही रह लिया जाए। मैं उन्हीं के घर रहने लगा, वहीं से मैं डेली अपने ऑफिस जाता और शाम को उनके घर पर आ जाता, मैं हमेशा ही सुलेखा से बात करता था। जब मैं दिल्ली जाने की तैयारी करने लगा तो मेरी भाभी ने मुझे अपने हाथ से बनाए लड्डू दिए और कहा कि यह तुम सुलेखा के मामा को दे देना, मैंने उन्हें कहा आपने इतना कष्ट क्यों किया, वह कहने लगी इसमें कष्ट की कोई भी बात नहीं है, मैं भी उनसे काफी समय से नहीं मिली हूं इसलिए मैंने सोचा उनके लिए कुछ बना दूं। मै जब ट्रेन में बैठा तो मैंने सुलेखा को फोन कर दिया, वह कहने लगी आप कितने दिनों के लिए यहां रुकने वाले हैं, मैंने उसे कहा कि मेरे पास रुकने का तो ज्यादा वक्त नहीं है लेकिन दो-चार दिन मैं रुक जाऊंगा, उसके बाद हम दोनों वापस आ जाएंगे। सुलेखा भी अब निश्चिंत है क्योंकि मैं उसे लेने के लिए जा रहा था और मेरा वहां काम भी था। मैं जब ट्रेन में था तो उस वक्त मुझे मेरा एक पुराना दोस्त मिला, उसके साथ उसकी पत्नी भी थी। मैंने उससे पूछा आज तो तुम कई बरसों बाद मुझे मिल रहे हो, उसका नाम संजय है, मैं संजय से काफी वर्षों बाद मिल रहा था इसलिए हम दोनों एक दूसरे से मिलकर खुश थे। मैंने संजय से पूछा तुम तो दिल्ली में जॉब करते हो, वह कहने लगा हां मैं दिल्ली में ही जॉब करता हूं लेकिन कुछ दिनों के लिए मैं अपने घर आया हुआ था।

उसने मुझे अपनी पत्नी से मिलवाया, उसकी पत्नी का नाम लता है, संजय मुझे कहने लगा लता भी स्कूल में टीचर हैं। वह मेरे पास ही बैठ गया, संजय ने मुझसे कहा तुम्हारी तो शादी हो चुकी है, मैंने उसे कहा हां मेरी शादी तो हो चुकी है, मैं अपनी पत्नी को ही लेने के लिए दिल्ली जा रहा हूं, वह अपने मामा के पास गई हुई है। हम दोनों अपने कॉलेज के दिन याद कर रहे थे, संजय की पत्नी लता बड़े ध्यान से हम दोनों की बातें सुन रही थी, लेकिन लता मुझे कुछ सही नहीं लग रही थी, उसकी नजरें जैसे सेक्स की भूखी हो, वह मेरे लंड को अपनी चूत में लेने के लिए उतारु बैठी थी। वह बार बार अपने स्तनों पर हाथ लगाती तो मैं भी उसके इशारे समझने लगा था। मैं जब संजय से बात कर रहा था तो मैं उसकी तरफ सिर्फ अपनी नजरें घुमा रहा था जिससे कि संजय को भी कोई शक नहीं हो रहा था, वह मुझसे बात कर रहा था जब संजय सो गया तो लता मेरे साथ बात करने लगी। मैंने उससे बात की और वह मुझे अपनी तस्वीरें दिखा रही थी जिसमें कि उसके स्तनों के ऊभार साफ दिखाई दे रहे थे।

मैंने जब लता के स्तनों पर हाथ लगाया तो वह जैसे मेरे लंड को अपनी चूत में लेने के लिए तैयार बैठी हुई थी। उसने मुझे कहा आज थोड़ा मजा कर ले हम दोनों जब ट्रेन के बाथरूम के अंदर घुसे तो वहां पर मैंने जब लता के नर्म होठों का रसपान किया तो वह मुझे कहने लगी तुम बड़े अच्छे तरीके से मेरे होठों का रसपान कर रहे हो ऐसा ही तुम मेरे होठों का रसपान करते रहो जिससे कि मैं और उत्तेजित हो जाऊं। मैंने उसके स्तनों को भी चूसना शुरू कर दिया था उसके स्तनों से तो मैंने खून भी निकाल दिया जब उसकी योनि ने पानी छोड़ा तो मैंने उसे घोड़ी बनाया और कहा मैं आज तुम्हारी चूत मारूंगा क्या तुम उसके लिए तैयार हो? वह कहने लगी मैं तो तुमसे अपनी चूत मरवाने के लिए उतारू बैठी हूं तुम एक बार मेरी टाइट चूत के अंदर अपने लंड को तो डालो जिससे कि तुम्हें मजा आ जाए। मैंने जैसे ही उसकी नरम और मुलायम चूत के अंदर अपने कड़क लंड को डाला तो वह चिल्लाने लगी और कहने लगी संजय का लंड बड़ा छोटा सा है वह मुझे संतुष्ट नहीं कर पाता इसलिए मैं अपने स्कूल के टीचरों से अपनी चूत मरवाती हूं। मैं समझ गया लता एक नंबर की मादरचोद औरत है और लंड की भूखी भी है, मैंने उसकी बड़ी सी गांड को अपने हाथ मैं कसकर पकड़ लिया और बड़ी तेजी से उसे झटके देने लगा। मैं उसे इतनी तेज धक्के मार रहा था वह मुझे कहने लगी तुम और भी तेज धक्के मारो जिससे कि मुझे मजा आ जाए। मैंने उसे बड़ी तेजी से चोदना शुरू किया, जब उसकी चूतडे मुझसे टकराती तो वह और भी ज्यादा उत्तेजित हो जाती और उसकी चूत ने भी पानी छोड़ना शुरू कर दिया। जब वह झड गई तो मैं भी उसे तेजी से धक्के देने लगा लेकिन 10 मिनट के अंदर ही मेरा भी वीर्य पतन हो गया कुछ देर तक मैंने उससे अपने लंड को चुसवाया जिससे कि वह भी खुश थी और मैं भी बहुत खुश हो गया। मैंने जब दोबारा से उसे घोड़ी बनाया तो उसकी योनि से मेरा वीर्य बाहर निकल रहा था और वह मुझे कहने लगी इस बार तुम मुझे बड़े अच्छे तरीके से चोदो और मेरी चूत का भोसड़ा बना दो। मैंने उसकी चूत के अंदर अपने लंड को डाल दिया और बड़ी तेज गति से उसे धक्के देने लगा। मैं उसे इतनी तेजी से झटके दे रहा था उससे भी बिल्कुल बर्दाश्त नहीं हुआ और जैसे ही मेरा वीर्य दोबारा से उसकी योनि के अंदर गिरा तो वह बहुत खुश हो गई और कहने लगी आज तो तुमने मेरी इच्छा पूरी कर दी, तुम्हारा मोटा लंड लेकर मैं बहुत खुश हूं।


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: Sunday, December 2nd, 2018
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