भाई से हवस का बदला लिया चुदाई...

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हैल्लो दोस्तों, यह मेरी एक सच्ची कहानी नहीं बल्कि मेरा वो रोचक सेक्स अनुभव है, जिसको में आज आप सभी कामुकता डॉट कॉम के चाहने वालों के लिए लेकर आई हूँ, जिसमें मैंने अपने भाई के साथ एक अलग तरह से अपनी चुदाई का मज़ा और उसको सज़ा देने का एक नया तरीका खोज निकाला और उसके साथ मज़े लिये। में उम्मीद करती हूँ कि यह आप सभी को जरुर पसंद आए। दोस्तों यह घटना मेरे साथ तब घटी थी जब मेरी उम्र 20 साल थी। में दिखने मे सुंदर, मेरा गोरा रंग, बड़े आकार के बूब्स, मटकती हुई सेक्सी गांड हर किसी को बहुत अच्छी लगती और हर एक मेरा दीवाना था। हर कोई मेरी चूत को अपना बनाना चाहता था और वैसे मुझसे बहुत अपनी चूत को चुदवाने की बहुत इच्छा होती थी। मुझे बहुत जोश था अपनी चूत को फड़वाने का और मैंने वैसा ही किया। दोस्तों हमारे घर मे उन दिनों बहुत ज्यादा मेहमान आते थे। आप यह मान लीजिए कि उनका आना जाना लगा ही रहता था। एक के बाद एक की बारी इसलिए मुझे वो मौका एक दिन मिल ही गया, जिसकी मुझे बहुत दिनों से तलाश थी। फिर उस बात का मैंने पूरा-पूरा फायदा उठाया और अपनी चूत को वो मज़े दिए और अब आगे की कहानी विस्तार से पढ़े। एक बार मेरे चाचा का लड़का भी हमारे घर पर आया हुआ था और वो हमारे साथ हमारे घर पर करीब एक महीने तक रुका था, यह उसी समय की कहानी है।

दोस्तों मेरा नाम रोज़ा है और मेरे चाचा के उस लड़के का नाम सागर था। वैसे हम लोगों का घर आकार मे बहुत बड़ा है और वो एक दिन किसी काम की वजह से मेरे रूम में आ गया और तब उसने मुझसे कहा कि उसके बाथरूम मे पानी नहीं है तो इसलिए वो मेरे बाथरूम में नहाना चाहता है। फिर मैंने उसकी पूरी बात को सुनकर उससे कहा कि हाँ ठीक है नहा लो और वो इतनी बात सुनकर तुरंत अंदर चला गया और कुछ देर बाद मुझे अंदर से कुछ अजीब सी आवाजे आने लगी। वैसे मेरे बाथरूम के दरवाजे में एक छोटा सा छेद था, इसलिए मैंने अंदर क्या चल रहा है यह जानने के लिए उसमे से अंदर झांककर देखा, तो वो बाथरूम के अंदर पूरा नंगा होकर मेरी पेंटी को अपने हाथ में लेकर चाट रहा था और ज्यादा जोश में होने की वजह से उसके मुहं से वो आवाजे बाहर आ रही थी और अब उसने वो पेंटी खुद ही पहन ली। फिर उसने कुछ देर बाद मेरी वो पेंटी उतारी और उसको अपने लंड पर लपेटकर उसको वो सामने वाली दीवार पर रगड़ने लगा और थोड़ी देर के बाद वो मेरी पेंटी में ही झड़ गया, मुझे यह सब उसके चेहरे से साफ साफ पता चल रहा था, क्योंकि वो अब बहुत थका हुआ सा लग रहा था और मैंने वो पूरा द्रश्य अपनी चकित आखों से वहीं पर खड़े होकर देखा था। अब मैंने वो सब देखने के बाद मन ही मन में सोचा कि ठीक है यह अगर यह इतना ही ज्यादा प्यासा जोश में है, तो में इसे अपनी चूत दिए देती हूँ। में भी तो देखूं कि इसके लंड में इतना कितना दम है और कितना जोश है और मैंने वैसे भी कई दिनों से अपनी चूत की चुदाई नहीं की थी। फिर कुछ देर बाद वो अपना सभी काम को खत्म करके बाहर आ गया, तभी मैंने उससे पूछा क्या तुम्हें पता है कि मेरे बाथरूम की सबसे अच्छी बात क्या है? तो वो बोला कि नहीं मुझे उसके बारे में कुछ भी पता नहीं है। में कुछ नहीं जानता? प्लीज मुझे भी बताओ। तब मैंने उसका हाथ पकड़कर दरवाजे की तरफ इशारा करते हुए कहा कि यह देखो इसके दरवाजे में यह एक छेद है जिसकी वजह से में इसके अंदर का सब कुछ बाहर बैठकर देख सकती हूँ और अंदर वाले को इसकी कोई भी जानकारी नहीं होती, में क्या कर रही हूँ मैंने क्या देखा? और मैंने आज तुम्हे भी देखा कि तुम इस बाथरूम के अंदर जाने के बाद क्या क्या कर रहे थे? तो वो मेरी यह बात सुनकर बहुत ज्यादा डर गया और उसके चेहरे का रंग फीका पड़ गया, माथे से पसीना बहने लगा और फिर मैंने उससे कहा कि तुम मुझसे अब बिल्कुल भी मत डरो, क्योंकि में बात बाहर किसी से भी नहीं कहूंगी, लेकिन बस ज़रा तुम मेरी पेंटी से अपना वो वीर्य धो दो। अब वो मेरे मुहं से यह बातें सुनकर बहुत ज्यादा चकित हो गया और मैंने उससे कहा कि अब तुम ज्यादा कुछ भी मत सोचो और ज्यादा टेंशन में मत जाओ, जो तुम तुम्हारा वीर्य मेरी पेंटी में डाल आए हो जाकर उसे धो आओ और फिर उसने जैसा मैंने उससे कहा ठीक वैसा ही किया। उसने मेरी पेंटी को धो दिया और उसी रात को जब घर के सभी लोग सो गये तो में उसके रूम में चली गयी और अब में उसके सामने तनकर खड़ी थी, वो मुझे अपनी डरी हुई नजर से बहुत चिंतित होकर देखने लगा। अब मैंने उससे कहा कि मुझे तुमसे अपना पुराना हिसाब किताब बराबर करना है। मेरे मुहं से यह बात सुनकर वो उसने कहा कौन सा हिसाब? तो मैंने उससे कहा कि वही पुराना हिसाब जो तुमने आज मेरी पेंटी के साथ किया था? अब वो मेरी इस बात को सुनकर बहुत खुश हो गया। मैंने उससे कहा कि तुम ज़्यादा खुश मत हो, में तुम्हें ऐसे छोड़ूँगी नहीं. बस में तुम्हारी अंडरवियर में पेशाब करूंगी और उसने मेरी बात को सुनकर अपनी अंडरवियर को तुरंत उतारकर मुझे दे दिया।

फिर मैंने उससे पूछा क्या तुम्हे अपनी जवान बहन के सामने इस तरह से नंगा होने में शर्म नहीं आती? वो बोला कि बहन तुम जवान हो, समझदार हो, इतनी समझ तुम में भी है और अगर फिर भी तुम मूतना चाहती हो तो मुझे किस बात की शरम? यह लो मेरी अंडरवियर और कर लो अपनी मन की इच्छा को पूरा, मुझसे बदला ले लो। अब में उसकी अंडरवियर को अपने हाथ में पकड़कर अपनी गांड को मटकती हुई बाथरूम के अंदर चली गई, वो मेरी गांड और मेरी चाल को देख रहा था और फिर मैंने अंदर जाकर उसमें मूत दिया और उसके बाद मैंने बाहर आकर उसको इशारा करके कहा कि अब तुम यह गीली अंडरवियर पहनकर सो जाओ। फिर उसने बहुत खुश होकर मेरे सामने अपनी अंडरवियर को पहन लिया और उसके बाद में उसके कमरे से बाहर जाने लगी तो उसने तुरंत मुझे पीछे से पकड़ लिया। उसके दोनों हाथ मेरी कमर पर थे और उसने अपना एक हाथ मेरे कपड़ो के ऊपर से ही ठीक मेरी चूत के ऊपर रख दिया था और उसका हाथ धीरे-धीरे हरकत में आ रहा था।

फिर मैंने उससे कहा कि अब तुम ज़्यादा जोश में भी ना आओ। अभी में चुदवाने के मूड में बिल्कुल भी नहीं हूँ, प्लीज अब जाने दो मुझे। अब वो मुझसे कहने लगा कि प्लीज रोज़ा तुम मुझे एक चुम्मा तो दे दो, उसके बाद चाहो तो चली जाना। फिर मैंने उससे कहा कि तुम्हे अभी कोई भी चुम्मा नहीं मिलेगा, प्लीज अभी मुझे बाहर जाने दो और फिर उसने मुझे जाने दिया और में सीधी अपने कमरे में चली गई और में अब उसकी बैचेनी जोश के बारे में सोचने लगी और वैसे उसको भी मेरी तड़प के बारे में पहले से ही पता था और वो बहुत अच्छी तरह से जानता था कि में लंड की बहुत प्यासी हूँ, लेकिन उसने मेरा वो असली रूप पहली बार देखा था। फिर दूसरे दिन सुबह वो एक बार फिर से मेरे बाथरूम में आ गया और वो दोबारा नहाने चला गया, लेकिन इस बार उसने जानबूझ कर दरवाजा बंद नहीं किया और उसने मुझसे बोला कि तुम चाहो तो अंदर आकर भी देख सकती हो कि में क्या क्या कर रहा हूँ? अब मैंने सबसे पहले जाकर अपने रूम का दरवाजा बंद किया, वो उस समय बाथरूम में नंगा था और उसने मुझसे मेरी पेंटी माँगी। फिर मैंने उससे कहा कि जो अंदर पड़ी हुई है तुम उसी को ले लो और उसी से अपना काम चला लो, लेकिन अब उसने कहा कि नहीं तुम मुझे अपनी वाली उतारकर दो, मुझे वो वाली चाहिए। अब मैंने भी कुछ बात सोचकर उसको अपनी पहनी हुई पेंटी को उतारकर दे दी और अब उसने तुरंत मेरी पेंटी को नीचे जमीन पर रखकर फैला दिया और फिर उसने अपना लंड मेरी पेंटी की उस जगह पर रख दिया जहाँ पर पेंटी के अंदर मेरी चूत होती है, उसके बाद वो खुद नीचे जमीन पर मेरी पेंटी पर लेट गया और अब उसने मेरे सामने मेरी पेंटी को ही चोदना शुरू कर दिया। फिर मैंने उससे कहा कि तुम मेरे सामने मेरी ही पेंटी के साथ यह सब क्या कर रहे हो? तो उसने मुड़कर मेरी तरफ देखा और वो बोला कि बस यही मेरी मर्जी है और यही मेरा बदला जो मुझे लेना था और उसने इतना कहकर मेरे सामने ही मेरी पेंटी को चोदा और फिर उसी में वो झड़ गया। उसने अपना गरम सफेद चिपचिपा वीर्य मेरी पेंटी में डाल दिया और अपने लंड को भी उससे साफ करके मुझे वापस दे दिया। अब मैंने देखा कि उसमें से उसका वीर्य बाहर तक निकलकर नीचे गिर रहा था और मैंने उसके वीर्य से सनी हुई अपनी पेंटी को दोबारा से उसी के सामने पहन लिया। अब तक मुझे भी बहुत मस्ती चड़ चुकी थी और कुछ देर बाद वो नहाकर मेरे बाथरूम और मेरे कमरे से बाहर चला गया। अब में उसके उस काम के बारे में सोचने लगी, जो उसने मेरी पेंटी के साथ मेरे सामने किया था। उसको सोच सोचकर में बहुत जोश में आ चुकी थी और अब में रात होने का इंतजार करने लगी, क्योंकि मुझे भी उससे अपना बदला लेना था। दोस्तों ये कहानी आप कामुकता डॉट कॉम पर पड़ रहे है।

फिर जब रात हुई तो में दोबारा उसके रूम में चली गयी और अब मैंने उसको मेरे सामने नंगा होने के लिए कहा। उसने मुझसे बिना कुछ सवाल पूछे ठीक वैसा ही किया जैसा मैंने उससे कहा। मैंने अब उसकी अंडरवियर को अपने हाथ में ले लिया और मैंने उसको पहन लिया। उसके बाद में सीधी होकर बेड पर लेट गई। उसके बाद में भी नंगी हो गयी थी। अब मैंने अपनी चूत को उसके सामने घिसना शुरू कर दिया और में अपनी चूत में ऊँगली डालकर अपनी चूत की चुदाई करने लगी थी और कुछ देर बाद मैंने उसकी अंडरवियर में ही अपनी चूत का पानी निकाल दिया और मैंने अपनी चूत का पूरा रस उसकी अंडरवियर में डाल दिया। उसके बाद मैंने उसको उसकी अंडरवियर को दे दिया और तब मैंने उससे कहा कि तुम अब इसको पहन लो। फिर उसने अपनी अंडरवियर को अपने हाथ में ले लिया और वो मेरी चूत का रस देखकर हंस दिया, तब मैंने उससे पूछा कि तुम ऐसे क्यों हंस रहे हो? तब उसने मुझसे कहा कि अगर यही रस मेरे मुँह में गिरता तो कितना मज़ा आता। तुमने इसको मेरी इस अंडरवियर में गिराकर खराब कर दिया। मुझसे यह बात कहकर उसने अपनी अंडरवियर को अपने ही मुँह में डाल लिया और अब उसमे से वो मेरी चूत का रस चूसने लगा और अपनी अंडरवियर को चाटने लगा। फिर मैंने उसको यह सब करते हुए देखकर पूछा कि तुम यह क्या कर रहे हो? वो मुस्कुराकर बोला कि तुम्हारी चूत का यह रस खराब नहीं होना चाहिए, इसलिए में इसको चूसकर इसका मज़ा ले रहा हूँ।

दोस्तों उसने मेरे ही सामने अपनी खुद की अंडरवियर को चाटा और उसमें से मेरा पूरा रस चूस लिया और वो सब देखकर में कुछ देर बाद अपने रूम में बहुत खुश होकर आ गयी और उसकी उस हरकत के बारे में सोच सोचकर खुश होती रही। फिर ना जाने कब मुझे नींद आ गई और में गहरी नींद में सो गई और उसके बाद में अगले दिन उठी, लेकिन अभी भी मेरे मन में उसकी वो बातें सभी काम मुझे याद आ रहे थे। सच कहूँ तो में बहुत खुश थी और कुछ देर बाद वो उस दिन भी मेरे कमरे में आया और नहाने के लिए सीधा बाथरूम में चला गया और उसके अंदर आ जाने के बाद मैंने अपने कमरे का दरवाजा बंद कर दिया और अब उसने मुझसे कहा कि तुम अब नंगी हो जाओ। फिर में उसके कहने पर उसके सामने पूरी नंगी हो गयी और उसके बाद उसने मुझे बेड पर लेटा दिया और फिर वो मेरे पूरे गरम जोश से भरे बदन को चूमने लगा। में उसके चूमने की वजह से कुछ ही सेकण्ड में बहुत गरम हो चुकी थी और अब मेरी साँसे भारी हो गयी थी और मेरे निप्पल तनकर खड़े हो गये थे। अब मैंने खुद ही अपनी चूत में उंगली को डाल लिया। में धीरे-धीरे अपनी ऊँगली को अंदर बाहर करने लगी, लेकिन तभी उसने मेरा हाथ पकड़कर मुझसे कहा कि रूको में हूँ ना, तुम्हारा यह काम में आसान कर देता हूँ और इतना कहकर उसने तुरंत मेरी चूत पर अपना मुँह लगाकर अपनी जीभ को अंदर डालकर मेरी चूत को चाटना शुरू किया और बहुत जमकर चाटा जिसकी वजह से में अब पूरी तरह से गरम हो चुकी थी और फिर मैंने उसके लंड को अपने मुहं में लेकर बड़े मज़े लेकर उसको चूसा और वो मेरी गांड को भी चाट रहा था। हम दोनों एक दूसरे के जिस्म में पूरे घुसे हुए थे। हम दोनों 69 की पोजीशन में थे। फिर उसने मुझसे पूछा कि बोल चोदूं या नहीं? तो मैंने उससे कहा कि आज तो तुम मुझे बस अब चोद ही दो। यह बात सुनकर उसने मेरे ऊपर से उठकर मेरी चूत में थोड़ा सा तेल लगा दिया और फिर उसके बाद उसने मेरी चूत के मुहं पर अपना लंड घिसना शुरू किया। जिसकी वजह से में बिल्कुल पागल हो गई और मैंने उससे कहा कि प्लीज अब डाल दो ना मेरी चूत के अंदर अपना लंड, क्यों मुझे इतना तरसा रहे हो, प्लीज थोड़ा जल्दी करो।

फिर भी उसने कुछ नहीं किया, बस वो मेरी चूत के मुँह पर अपने लंड के टोपे को लगातार घिसता रहा। जिसकी वजह से में पूरी तरह से गरम हो चुकी थी। मैंने उससे कहा कि प्लीज अब तो डाल दो ना अंदर, में अब इस आग में जल रही हूँ, लेकिन तब भी उसने अपना लंड मेरी चूत के अंदर नहीं डाला और मुझे उल्टा किया और अब वो अपना लंड मेरी गांड के छेद पर घिसने लगा। मैंने कहा कि प्लीज अब तो जल्दी से डाल दो ना, लेकिन वो अपने लंड को घिसते-घिसते मेरी गांड के बाहर ही झड़ गया तो मैंने उससे पूछा कि यह तुमने क्या किया। तुम मुझे चोद क्यों नहीं रहे? तब उसने कहा कि मुझे तो बस तुमको पूरी तरह से गरम करना था। में अब वापस जा रहा हूँ और तुम अगर चाहो तो आज रात को अपना हिसाब मुझसे बराबर कर लेना। फिर मैंने उससे कहा कि हाँ ठीक है, में आज रात को तुमसे जरुर मिलूंगी, तुम तैयार रहना और फिर वो रात आ गई जिसका मुझे बहुत ज्यादा इंतजार था। में उसके रूम में चली गयी और मेरे हाथ में आज एक लकड़ी थी। मैंने उस लकड़ी से जाकर सीधे उसके पैरों के बीच में मारा। उसकी गांड फट गयी, वो मुझसे डर गया। मैंने उससे कहा कि अब तुम जल्दी से पूरे नंगे हो जाओ और वो नंगा हुआ। मैंने उसका लंड अपने मुहं में ले लिया और चूसना शुरू किया। में ज़ोर-ज़ोर से उसका लंड चूस रही थी, जिसकी वजह से वो बहुत ही कम समय में तनकर खड़ा हो गया और अब वो बहुत गरम था।

फिर मैंने लंड के साथ-साथ उसके आंड भी अपने मुँह में लेकर चूसे, वो अब झड़ने वाला था मैंने उससे कहा कि अभी मत झड़ना और उसने कंट्रोल कर लिया। अब मैंने उसको सीधा लेटा दिया और में उसके ऊपर चड़ गयी। तब उसने मुझसे कहा कि प्लीज थोड़ा सा तेल लगा लो, मैंने कहा कि नहीं एकदम सूखा होगा तब ही ज्यादा मज़ा आएगा और मैंने उसका लंड हाथ में लेकर सीधा किया और में उस पर बैठ गयी। उसका लंड मेरी चूत में जाने लगा, जिसकी वजह से उसको दर्द के साथ-साथ बहुत मज़ा भी आने लगा और उस वजह से उसका पूरा मुँह खुल गया। मेरी चूत भी अब तक बड़ी टाईट हो गयी थी, जिसकी वजह से अब उसको ज्यादा दर्द हुआ, क्योंकि चिकनाई भी नहीं थी। फिर मैंने अब खुद को उसके लंड पर संतुलन बनाकर ऊपर नीचे होना शुरू कर दिया। अब वो भी जोश के साथ-साथ बहुत दर्द में था, क्योंकि में ऊपर उठकर सीधे उसके लंड पर बैठ जाती और उसके आंड को में अपने एक हाथ में पकड़े हुए थी, जिसको में ज़ोर से दबा भी रही थी। यह चुदाई कम बल्कि उसकी सजा ज़्यादा थी, क्योंकि सुबह उसने मुझे प्यासा ही रहने दिया था। इसलिए उसे मेरी तरफ से यह सजा मिल रही थी, जिसकी वजह से वो मज़े में भी था और दर्द में भी। मैंने अपनी स्पीड को बड़ा दिया और उसके आंड को भी में ज़ोर से दबाने लगी थी, लेकिन अब उसकी हालत ज्यादा खराब थी। में अब ज़ोर-ज़ोर से उसके लंड पर ऊपर नीचे हो रही थी और अब में झड़ने वाली थी, लेकिन अभी उसके झड़ने में बहुत देर थी। मैंने अपनी स्पीड को ओर भी तेज कर दिया था और जैसे ही मेरी चूत का रस निकलने वाला था, मैंने उसके लंड से उठकर में तुरंत उसके मुँह पर बैठ गयी। अब एक ही पल में मेरा रस और मूत दोनों मेरी चूत से बाहर आने लगे। मैंने उसकी नाक को दबा दिया था, जिससे कि उसका मुँह पूरा खुल गया और मेरा यह सारा रस उसके मुँह में ही गिर गया। फिर वो चकित हो गया और उसको भी खाँसी आ गयी। अब जाकर मेरा उससे वो बदला पूरा हुआ। मैंने उसको उठने दिया। फिर मैंने देखा कि उसका लंड एकदम लाल था और उसको बहुत दर्द भी हो रहा था, तो वो मुझसे बोला कि साली कुतिया तूने आज मेरी माँ को चोद दिया है। अब मैंने उससे कहा कि रूको, तुम अभी तक झड़े नहीं हो। मैंने उसको एक बार फिर से लेटा दिया और अब उसके आंड मुँह में डाल लिए। अब उसके आंड भी फूल गये थे।

फिर मैंने बारी-बारी से एक-एक को चूसा और उनके ऊपर काटा भी, उसे मज़ा भी आ रहा था और दर्द भी। मैंने उससे कहा कि जब झड़ने लगो तो तुम मुझे जरुर बता देना। फिर उसने कहा कि हाँ ठीक है। में अब उसके लंड पर बहुत ज़ोर-ज़ोर से अपना हाथ घुमा रही थी। उसका लंड खून जैसा पूरा लाल-लाल हो गया था, तभी उसने मुझसे कहा कि हाँ अब में झड़ने वाला हूँ। मैंने उसका लंड जहाँ से शुरू होता है वहाँ पर बहुत ज़ोर से दबा दिया और इतने ज़ोर से कि उसका रस बाहर ही ना निकल पाए और उसके आंड एकदम से बहुत मोटे हो गये, लेकिन वो झड़ नहीं पाया। उसे बहुत दर्द हुआ और वो चिल्ला दिया मादरचोद छिनाल रंडी तू यह क्या कर रही है? लंड छोड़ दे मेरा झड़ने तो दे, कुतिया साली रंडी अब दोबारा मेरी माँ मत चोद, चुपचाप छोड़ दे इसको। फिर मैंने उससे कहा कि आज सुबह तुम मुझे प्यासी तड़पती हुई छोड़कर आए थे ना, लो अब भुगतो उसको। दर्द अब बहुत ज़्यादा हो रहा था और उसने मुझसे कहा कि कहीं कुछ गड़बड़ ना हो जाए, प्लीज अब मुझे झड़ जाने दो। फिर मैंने कहा ठीक है और इतना कहकर मैंने जैसे ही उसका लंड अपने मुँह में लिया, लेकिन तभी उसने अपने लंड को बाहर खींच लिया और वो कहने लगा कि तुम बहुत बड़ी चुदेल हो। मुझे तुम पर अब बिल्कुल भी भरोसा नहीं है, तुम फिर से मेरा लंड दबा दोगी और वीर्य को बाहर नहीं निकलने दोगी। उससे अच्छा है कि में खुद ही अपना लंड हाथ में लेकर हिला लेता हूँ।

अब में उसकी वो बात सुनकर हंसने लगी। मैंने उससे कहा कि तुम कितने बड़े फट्टू हो, क्या बात है तुम्हारी गांड बहुत फटती है? तब वो कहने लगा कि जब लंड पर लगे तो सबकी ऐसे ही फटती है और फिर मैंने उसका लंड छोड़ दिया। उसने अपना लंड अपने हाथ में ही ले लिया और वो उसको धीरे-धीरे हिलाने लगा। में वहीं पर बैठी देख रही थी, उसने अपना लंड हिलाया और जल्दी ही वो मेरे सामने झड़ गया। हम दोनों वहीं पर कुछ देर पड़े रहे और उसके बाद में उठकर अपने रूम में आ गई। दोस्तों उसके बाद से वो हर सुबह नहाने के बहाने से मेरे रूम में आ जाता और वो मेरे ऊपर चड़ जाता और मुझे बहुत प्यार से चोदता और अपने लंड के मज़े देता। चुदाई खत्म होने के बाद वो नहाकर अपने कमरे में चला जाता और रात को में उसके रूम में जाकर उसके ऊपर चड़कर उसको चोदती थी। ऐसा हमारे बीच तब तक हुआ जब तक हमें वो अच्छा मौका मिलता, लेकिन हमारी चुदाई से हम दोनों बहुत खुश थे। हम दोनों अब किसी को भी कोई सज़ा नहीं दे रहे थे। हम तो मज़े देने लगे और चुदाई करने लगे। यह सब तब तक चलता रहा जब तक वो मेरे घर पर रहा ।।


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Added: Saturday, November 26th, 2016
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Category: Hindi Sex Stories

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