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सपना पूरा करने के लिए जिगोलो...

मेरा नाम अरविंद है। मैं जयपुर का रहने वाला हूँ। मेरे पिताजी एक बिजनेस मैन है। और वह मुझे भी अपनी तरह बनाना चाहते थे। मेरी माँ एक एन•जी•ओ चलाती है। मेरी एक छोटी बहन भी है। वह अभी पढ़ाई कर रही है। मेरा कॉलेज खत्म होने को बस थोड़ा ही समय है। इस बीच मैंने और मेरे दोस्तों ने खूब मस्ती की मेरा डांसिंग में बहुत इंट्रेस्ट था। मुझे बचपन से ही डांसिंग का शौक था। मैं अपनी पढ़ाई पूरी करने के बाद डांस क्लास जाता था। हमारे कॉलेज में जब भी कोई फंग्शन होता तो सबसे पहले मैं ही पार्टीसिपेट करता था। मैं अपना कैरियर डांसिंग में ही बनाना चाहता था।

मुझे डांस करना बहुत अच्छा लगता था। कुछ समय बाद मेरा कालेज पूरा हो गया। कॉलेज पूरा होने के बाद मैंने अपना छोटा सा डांस क्लास खोल लिया था। अब मैं बच्चो को डांस सिखाता था। लेकिन मेरे पिताजी चाहते थे कि मैं उनकी तरह तरक्की करूं। पर मेरा सपना था की मैं एक अच्छा डांसर बनु। और अपने पिताजी की तरह नाम कमाऊं। पर एक डांसर बन कर। मेरे घर मे मेरा सपोर्ट करने वाला कोई नही था। सब यही कहते थे कि मैं अपना करियर इसमे खराब कर रहा हूँ। मुझे कुछ और करना चाहिए। सब ने मुझे बहुत समझाया। लेकिन मुझे अपने सपने पूरे करने थे। इन सब की बाते सुनकर मुझे ऐसा लगने लगा था कि अब इनमे से कोई भी मेरा साथ नही देगा। इसलिए मैंने यहां से कही दूसरे बड़े शहर जाने की सोची। लेकिन मुझे अपने पिताजी का डर भी था। मैं क्या बोल कर घर से जाता। मैं कई दिनों तक घर से निकलने की तरकीब सोच रहा था। अगर मैं घर से जाऊंगा तो मुझे पैसो की भी जरूरत पड़ेगी। लेकिन इतने पैसे मैं घर वालो से क्या बोलकर लेता। फिर मैंने सोचा क्यों ना मैं घर से पैसे चुराकर भाग जाऊं। लेकिन यह करना भी मुझे ठीक नही लग रहा था। पर मुझे घर से जाने के लिए कुछ न कुछ तो करना ही था। फिर मैंने सोचा कि क्यों न पिताजी के साथ उनके कामो में थोड़ा हाथ बटाया जाए। तब जाके थोड़े पैसे जमा हो पाएंगे।

एक दिन जब सारे घर वाले खाना खा रहे थे। तो मैंने पिताजी से यह बात कही। सब मेरी बात सुनकर हैरान हो गए थे। और मेरे पिताजी तो बहुत खुश हुए। उनको इस तरह खुश देखकर मुझे भी बहुत अच्छा लगा। मैंने सोचा अगर मैं पिताजी के साथ यूँ ही मिलकर काम करूं तो वह कितने खुश हो जाएंगे। और उनको काम की ज्यादा फिक्र भी नही होगी। लेकिन मेरे सपनों का क्या होता। मैं उनके सपने भी पूरा करना चाहता था । लेकिन मुझे भी तो अपनी पहचान बनानी थी। कब तक लोग मुझे यू मेरे पिताजी के नाम से जानते। मैं चाहता था की लोग मुझे मेरे नाम और मेरे डांस को देखकर मुझे जाने। मैं तो बस इतना ही चाहता था। पर मेरे घर वालो का तो अलग ही सोचना था। वह भी गलत नही सोच रहे थे। मुझे अपने पिताजी के बिजनेस में कोई इंटरेस्ट नही था। इसलिए मैं घर से बाहर जाना चाहता था। अपना नाम बनाना चाहता था।

मैंने पिताजी के बिजनेस में उनका हाथ बटाना शुरू कर दिया और वह उसके बदले में वह मुझे कुछ पैसे भी देने लगे। जिससे कि मेर पास कुछ पैसे जमा हो गए। मैंने उनके साथ पूरे 6 महीने तक अच्छे से काम किया और 6 महीने में जो भी मेरे पास पैसे जमा हुए। मैंने उन्हें बहुत संभाल कर अपने अकाउंट में रख दिया था। ताकि मैं उन्हें खर्च ना कर सकूं और मुझे वह मेरे सपने पूरे करने में काम आ सके। मेरे पिताजी भी मेरे काम से बहुत खुश हो गए थे। वह कहने लगे तुम बहुत अच्छे से काम करते हो और मन लगाकर काम करते हो ऐसे ही यदि तो एक दिन तुम बहुत आगे बढ़ जाओगे और मुझसे भी ज्यादा तुम बिजनेस में नाम कमाओगे। लेकिन मेरे सर पर तो सिर्फ डांस का भूत सवार था। मुझे तो डांस ही डांस दिखाई देता था। उसके अलावा मुझे कुछ और कभी भी नहीं सोचता था। मेरे पिताजी ने अब यह सब कहना छोड़ दिया था क्योंकि मैं उनके साथ हाथ बटाने लगा था। उनके काम में और मैं उनके ऑफिस भी उन्हीं के साथ जाता था। मेरे पास इतने पैसे हो चुके थे कि मैं अपना सपना पूरा कर पाऊंगा और मैंने फैसला कर लिया कि मैं मुंबई चला जाऊंगा।

मैं किसी को भी बिना बताए चुपके से रात को ट्रेन में मुंबई निकल गया और मैंने अपने पिताजी को उनके फोन पर एक मैसेज छोड़ दिया था। उनके नाम पर एक खत लिख दिया था कि मैं अपने सपने पूरा करना चाहता हूं इसलिए मैं मुंबई जाना चाहता हूं। शायद वह मेरे इस फैसले से बहुत दुखी होंगे लेकिन मुझे भी एक ट्राई तो करना ही था। जब मैं मुंबई पहुंचा तो सबसे पहले मैंने वहां पर रहने का बंदोबस्त किया। मैंने रहने के लिए एक फ्लैट लिया ताकि मुझे कोई समस्या ना हो पाए। अब मैंने ऑडिशन देने शुरू किए मैं जितने भी ऑडिशन में जाता। वहां सब जगह निराशा ही मेरे हाथ लगती। लेकिन मेरी जान पहचान अब सब लोगों से होने लगी थी। तो मुझे काफी लोग जानने में लगे थे। मेरे सारे पैसे खत्म होने लगे। जब मेरे पास सिवाय घर जाने के कोई और चारा नहीं था। लेकिन मैं हिम्मत नहीं हारा था और मुझे ऑडिशन देना ही था।

इस बार मैं जहां पर ऑडिशन देने गया। वहां पर एक महिला ऑडिशन ले रही थी। उसने मुझे कहा तुम मुझे ऑडिशन खत्म होने के बाद मिलना। उसने मुझे अपना नंबर दिया। मैंने उसे फोन किया। उसके बाद उसने मुझे अपने घर पर बुला लिया। उसने जब मुझे अपने घर बुलाया तो उसने सीधे शब्दों में मुझे कहा कि तुम्हें मुझे खुश करना पड़ेगा। उसके बाद मैं तुम्हारी जिंदगी बदल दूंगी। मुझे भी पैसों की जरूरत थी। तो मैंने उसे कह दिया कि मुझे फिलहाल पैसों की जरूरत है। तुम्हें वह पूरे करने पड़ेंगे। उसने मुझे कहा ठीक है मैं तुम्हें पैसे दे दूंगी। वह काफी सुंदर और हॉट थी। उसने जैसे ही मेरे कपड़े उतारे तो वह कहने लगी तुम्हारी बॉडी तो काफी सख्त है। तुम्हारे पेट में बिल्कुल भी चर्बी नहीं है। मैंने उसे कहा यह सब इतने सालों से डांस कर रहा हूं उस की बदौलत है।

उसने अपनी जींस को उतारते हुए। मुझे कहा कि तुम्हें मेरी चूत को अच्छे से चाटना है। मैंने उसकी चूत तब तक चाटता गया। जब तक उसने मुझे यह नहीं कहा कि अब बहुत हो गया। मैंने उसकी चूत मे अपने दांत भी मार दिए थे। उसके बाद उसने अपने चूचो को मेरे मुंह पर लगा कर कहने लगी। तुम्हें मेरे चूचो को भी अच्छे से चूसना है। मैं अपने मुंह से उसके बूब्स को चूसना शुरू किया। जैसे ही मैं उसके बूब्स को चूसता। वह मजे मे आ जाती और कहती तुम बड़े ही अच्छे से मेरे चूचो को उसको चाट रहे हो। मैंने उसके स्तनों से दूध भी बाहर निकाल दिया और उन्हें बड़ी तेजी से दबाने लगा। थोड़ी देर बाद मैंने उसके बूब्ज़ पर अपने को लंड को रगड़ना शुरू किया। जिससे कि वह बहुत खुश हो गई और उसकी योनि से भी पानी निकल रहा था। मैंने भी उसे कहा कि कंडोम है तुम्हारे पास उसके बाद मैंने कंडोम पहनते हुए। उसकी गीली योनि में अपना लंड घुसेड़ दिया। जैसे ही मैंने उसकी चूत मे अपना लंड डाला तो वह कहने लगी तुम्हारा लंड बहुत ही मोटा और सख्त है। मुझे बहुत ही अच्छा लग रहा है और मैं अपने लंड को ऐसे ही अंदर-बाहर करता रहा। वह काफी संतुष्ट हो रही थी। थोड़े समय बाद मेरा वीर्य निकलने वाला था। मैंने अंदर ही गिरा दिया क्योंकि मैंने छतरी पहनी हुई थी। इस वजह से उसकी योनि में ना जाकर सारा कंडोम में ही भर गया। मैंने अपने वीर्य को बाहर निकाला और उसकी योनि में कंडोम से सारा वीर्य गिरा दिया। वह बहुत खुश हुई उसके बाद उसने मुझे कहा कि तुम बहुत ही अच्छे से चोदते हो और तुम ऐसे ही सबको खुश करते रहोगे। तो एक दिन बहुत आगे बढ़ोगे। अब उसने मुझे एक चांस भी दे दिया था और कुछ पैसे भी दे दिए थे।

वह पैसे ज्यादा दिन तक नहीं चलने वाले थे। उसके बाद मैंने जिगोलो बनने का फैसला किया। मैंने कई औरतों से ऐसे ही संबंध बनाए और मैं आगे बढ़ता गया। आज मैं एक अच्छे मुकाम पर पहुंच गया हूं। जिससे कि मेरे पिताजी बहुत खुश है और वह यह कहते रहते हैं कि तू अपनी जगह सही था। मैंने कई औरतों के साथ संबंध बनाएं हैं और अब भी मैं इसी काम में लगा हुआ हूं। वह औरते मुझे अपने घर पर बुलाती हैं और मैं उनकी चूत मे अपना लंड डालता हूं और उन्हीं चूत की प्यास को बुझाता हूं। जिससे मुझे भी खुशी मिलती है और वह भी खुश हो जाती हैं।


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Added: Monday, September 3rd, 2018
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