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मकान मालकिन की रसभरी चूत...

मेरा नाम हर्ष है और मैं अहमदाबाद का रहने वाला हूं। मैं अहमदाबाद की कंपनी में काम करता हूं और मुझे यहां पर काम करते हुए काफी समय हो चुका है, मेरी उम्र 27 वर्ष है। मुझे इस कंपनी में काम करते हुए 4 साल हो चुके हैं और तब से मैं इसी कंपनी में काम कर रहा हूं। अब मेरा प्रमोशन भी हो चुका है और मेरे प्रमोशन के बाद कंपनी ने मुझे दिल्ली के ऑफिस में भेज दिया क्योंकि मेरा घर अमदाबाद में है इसीलिए मुझे बहुत ही बुरा लग रहा था दिल्ली जाने में लेकिन मुझे अपना काम भी देखना था और मुझे दिल्ली में एक अच्छी सैलरी पर एक कंपनी के द्वारा भेजा गया है इसलिए मैंने सोचा कि मैं कुछ समय दिल्ली में ही काम कर लेता हूं।
जब शुरुआत में मैं दिल्ली आया तो मुझे दिल्ली के बारे में ज्यादा जानकारी नहीं थी और मैं लोगों से पूछ कर अपने ऑफिस जाता था परंतु मुझे धीरे-धीरे दिल्ली में समय होने लगा और मैं अब काफी लोगों से परिचित भी हो चुका था इसलिए मुझे दिल्ली में बहुत अच्छा लगने लगा। मैं अपने घर पर हमेशा ही फोन कर देता था, मेरे पिता भी बहुत खुश होते थे, वह कहते थे कि तुम हमें हमेशा ही फोन करते हो हमें बहुत अच्छा लगता है। मैं अपनी मां से भी काफी देर तक बात किया करता था। मेरा छोटा भाई अभी कॉलेज में ही पड़ रहा है इसलिए मैं ही उसे जेब खर्चा देता हूं। मैं उसके अकाउंट में हमेशा पैसे भेजता हूं तो वह बहुत ही खुश होता है जब मैं उसके अकाउंट में पैसे भिजवा देता हूं लेकिन जिस जगह मैं रह रहा था, वहां से मेरा ऑफिस काफी दूर था इसलिए मैं सोचा था कि मुझे अपने ऑफिस के आस-पास ही कहीं पर घर देखना चाहिए लेकिन मैं समय नहीं निकाल पाता था इस वजह से मैं अपने लिए घर नहीं देख पा रहा था। मैंने अपने ऑफिस के एक मित्र से कहा कि यदि तुम्हारी नजर में कहीं ऑफिस के आसपास ही कोई घर हो तो मुझे तुम बता देना, वह दिल्ली का ही रहने वाला है इसलिए उसने मुझे कहा कि तुम बिल्कुल भी चिंता मत करो मैं तुम्हें जल्दी ही बता दूंगा। कुछ दिनों बाद उसने मुझे कहा कि मेरे घर के पास में ही एक घर खाली है, यदि तुम वहां पर देखना चाहो तो देख सकते हो। मैं उस दिन उसी के साथ चला गया। जब उसने मुझे वह घर दिखाया तो मुझे बहुत अच्छा लगा।

मैं जब वहां के ओनर से मिला तो वह मुझसे पूछने लगे कि तुम क्या करते हो, मैंने उन्हें अपनी कंपनी का विजिटिंग कार्ड दे दिया और उसके बाद वह संतुष्ट हो गए। उन्होंने मुझे घर का किराया बताया और मैंने कुछ दिनों में ही अपना सामान वहां पर शिफ्ट करवा दिया। उन व्यक्ति का नाम मोहन है और उनका पूरा परिवार ही वहां पर रहता है। उनकी उम्र भी 35 वर्ष के आसपास है, उनकी पत्नी भी उन्हीं के साथ रहती हैं और उनके छोटे बच्चे भी हैं जो कि स्कूल में पढ़ते हैं। मुझे उनके साथ रहते हुए अब काफी समय हो गया। मेरा उनसे बहुत ही अच्छा संबंध बन चुका था क्योंकि मुझसे उन्हें किसी भी प्रकार की कोई परेशानी नहीं होती थी और वह हमेशा ही मेरी तारीफ करते थे और कहते थे कि तुम बहुत ही अच्छे से यहां पर रहते हो। मैंने उन्हें कहा कि मुझे अपने आसपास का माहौल बिल्कुल शांत अच्छा लगता है इसलिए मैं ज्यादा शोर शराबा पसंद नहीं करता। मोहन जी का भी अपना ही कारोबार था इसलिए वह अपने कारोबार के सिलसिले में अक्सर बाहर जाते थे। जब भी वह बाहर जाते तो मुझे कह देते कि तुम घर का ध्यान रखना क्योंकि आसपास बहुत चोरियां होती हैं इसलिए तुम ही घर का ध्यान रखना और वह मुझ पर बहुत भरोसा करते थे इसलिए मैं उनके घर का बहुत ध्यान रखता था। कुछ समय पहले ही उनके घर पर चोरी हो गई थी। उनकी पत्नी के जेवरात किसी ने चोरी कर लिये थे इसी वजह से वह बहुत डरे हुए थे। उनकी पत्नी का नाम संगीता है, वह भी व्यवहार में बहुत अच्छी हैं जब भी मुझे कभी ऑफिस जाने में लेट हो जाती है तो वह मुझे खाना बना कर दे देती हैं। मेरे माता-पिता भी कुछ दिनों के लिए दिल्ली आ गये और जब वह दिल्ली आए तो वह मोहन जी और संगीता भाभी से मिलकर बहुत खुश हुए, वह कहने लगे कि यह लोग बहुत ही अच्छे हैं और बहुत ही संस्कारी हैं।

उन्होंने कहा कि मुझे कभी भी किसी प्रकार की कोई समस्या नहीं हुई, मुझे भी इतना समय उनके साथ रहते हुए हो गया है लेकिन मुझे कभी भी कोई समस्या नहीं हुई। मेरे माता-पिता भी मेरे पास काफी समय तक रहे उसके बाद वह वापस लौट गए। मेरी जब भी छुट्टी होती तो उस दिन मैं घर पर ही रहता था और मुझे किताबें पढ़ने का बहुत शौक है इस वजह से मैं कुछ किताबें पढ़ता था। मुझे ज्यादा इधर-उधर जाना बिल्कुल भी पसंद नहीं है इसलिए मैं घर पर ही रहता था और किताबें पढ़ता था। एक बार मोहन जी कहीं गए हुए थे और उनके बच्चों ने घर का दरवाजा बाहर से बंद कर दिया और संगीता भाभी अंदर ही थी लेकिन कोई भी दरवाजा नहीं खोल रहा था और मैं भी अपने कमरे के अंदर ही था इसलिए मुझे उनकी आवाज सुनाई नही दे रही थी। उनके बच्चे दरवाजे बंद कर के बाहर चले गए और वह अंदर ही थी। वह जब तक घर की साफ सफाई कर रही थी तब तक तो उन्हें पता नहीं चला लेकिन बाद में जब उन्हें कुछ काम से बाहर जाना था तो बाहर से दरवाजा बंद था इसलिए वह दरवाजा खोलने के लिए आवाज लगा रही थी लेकिन मुझे सुनाई नहीं दे रहा था। उसके बाद उन्होंने मेरे नंबर पर फोन कर दिया और मैं जब नीचे गया तो मैंने दरवाजा खोल दिया। मैंने जब दरवाजा खोलो तो वह मुझे कहने लगे कि यह दरवाजा किसने बंद कर दिया, मैंने कहा कि मुझे तो नहीं पता यह दरवाजा किसने बंद कर दिया, तब उन्हें पता लगा कि उनके बच्चों ने ही दरवाजा बंद किया है और वह खेलने के लिए चले गए। वह बहुत ज्यादा घबरा गई थी। मैंने उसके बाद उन्हें पानी पिलाया फिर वह थोड़ा शांत हुई।

उनका बीपी बहुत ज्यादा बढ़ चुका था। वह फिर आराम करने लगी और मैं उनके लिए बाहर से कुछ दवाइयां ले आया। जब मैंने उन्हें दवाई खिलाई तो उनको थोड़ा आराम मिला और मैं उनके पास ही बैठा हुआ था उनके बड़े बड़े स्तन मेरी नजरों के सामने थे मैंने जैसे ही उनके स्तनों पर हाथ लगाया तो मुझे बहुत अच्छा महसूस होने लगा। वह भी ठीक हो गई और मै उनके स्तनों को बड़ी तेजी से दबाने लगा। अब वह पूरे मूड में आ गई मैंने उनके कपड़े खोल दिए और उनके स्तनों को अपने मुंह में लिया उन्हें बहुत अच्छा महसूस होने लगा और वह मेरा पूरा साथ देने लगी। उनके दोनों पैरों को चौड़ा कर लिया मैने उनकी योनि पर जब अपनी जीभ को लगाया तो उसे बहुत ज्यादा पानी बाहर की तरफ निकल रहा था। मैंने संगीता भाभी की चूत मे अपने लंड को डाल दिया जब मेरा लंड उनकी योनि के अंदर घुसा तो मुझे बड़ा आनंद आने लगा और वह मेरा पूरा साथ देने लगी। उनके मुंह से सिसकियां बाहर निकल आती मेरा लंड उनकी पूरी गहराई तक चला जाता। काफी देर ऐसे करने के बाद मैंने बिस्तर पर उन्हें उल्टा लेटा दिया और उनकी गांड को देख कर बहुत ज्यादा मोहित हो गया। मैंने जैसे ही उनकी योनि के अंदर अपना लंड डाला तो वह चिल्लाने लगी और उन्हें बहुत अच्छा महसूस होने लगा। मैंने भी उन्हें बड़ी तेजी से धक्के देना शुरू कर दिया वह भी अपनी चूतडो को ऊपर की तरफ करती जाती मुझे बहुत अच्छा महसूस होने लगा और मुझे भी बहुत मजा आ रहा था। वह अपनी चूतडो को ऊपर कर रही थी और मैं उन्हें बड़ी तेजी से धक्के मार रहा था मुझसे भी बिल्कुल उनकी चूत की गर्मी बर्दाश्त नहीं हो रही थी लेकिन फिर भी मैं उन्हें झटके देने पर लगा हुआ था। मैंने उन्हें इतनी तेज झटके मारे कि मेरा शरीर दुखने लगा था मेरा पूरी लंड छिल चुका था। मुझे बहुत मजा आने लगा और मैं उन्हें तेज तेज धक्के देता रहा जिससे कि उनकी योनि से गर्मी बाहर की निकलने लगी और मैं उनकी गर्मी को बिल्कुल भी बर्दाश्त नहीं कर पा रहा था। जैसे ही मेरा माल संगीता भाभी की योनि में गिरा तो उन्हें बहुत अच्छा महसूस होने लगा और अब उनकी तबीयत भी ठीक हो चुकी थी।


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Added: Wednesday, December 5th, 2018
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